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जीबन में सफ़लता प्राप्त करने के के 20 महत्वपूर्ण टिप्स ( 20 Tips – How to be Successful in Life )

How to be Successful in Life
Written by Nitin Gupta

नमस्कार दोस्तो , आज की पोस्ट थोडी बडी है लेकिन यह बात निश्चित है कि आपको इस पोस्ट से अपने जीबन के लक्ष्य प्राप्त करने के दौरान आने बाली सभी समस्याओं का समाधान मिलेगा तो आपसे निबेदन है कि इसे अपने Browser के Bookmark में Save कर लें और इसे जब भी  बक्त मिले पढते रहिये !

दोस्तो सफलता प्रत्‍येक व्‍यक्ति की आकांक्षा है। हर व्‍यक्ति जीवन में सफल होने की अभिलाषा लिए प्रयास करता है। हर व्‍यक्ति चाहता है कि उसकी गिनती सफलतम व्‍यक्तियों में हो, उसके लिए वह प्रयत्‍न करता है। प्रत्‍येक व्‍यक्ति अपनी योग्‍यता, क्षमतानुसार , अपनी समझ के अनुसार मेहनत करता है। सफलता कैसे मिलेगी, कब मिलेगी, यह हर व्‍यक्ति जानने का इच्‍छुक है।  

अफलता अर्जित की जा सकती है, इसकी कोई गणितीय विधि या ज्‍योतिषीय मंत्र नहीं है। सफलता वस्‍तुत: बहुत सारे गुणों का व्‍यक्ति की योग्‍यता, क्षमता को तयशुदा दिशा में लगाने का समग्र प‍्रतिफल है। सफलता प्राप्ति का मार्ग दुर्गम है, संघर्षमय है। इस मार्ग पर चलने वाले राही को न केवल अपने लक्ष्‍य प्राप्ति हेतु संकल्पित होकर अग्रसर होने की आवश्‍यकता है, बल्कि असफलता हेतु भी सहर्ष तैयार रहने की ज़रूरत है। असफलता की राह ही सफलता की बुलन्दियों पर परचम लहराने की बुनियाद बनती है।

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सफलता कैसे मिलेगी ? ( How to Get Success )

अभी हम इस प्रश्‍न का समाधान ढूँढने का प्रयास करते हैं। बस्‍तुत: सफलता किसी एक गुण, एक लक्षण का परिणाम नहीं है। एक जैसी शैक्षिक योग्‍यता वाले कई छात्र एक अभीष्‍ट परीक्षा में बैठते हैं, सभी तो सफल नहीं होते हैं?

एक-जैसा व्‍यवसाय शुरू करने वाले दो व्‍यक्तियों में से एक व्‍यक्ति सफल हो जाता है, दूसरा अपना धन नष्‍ट करके बर्बाद हो जाता है। आपने देखा होगा, दो प्रायवेट डॉक्‍टरों में से एक की प्रैक्टिस बहुत अच्‍छी चलती है, दूसरा खाली बैठा रहता है। आपके शहर, कस्‍बे में, एक मिठाई की दुकान पर भीड़ लगी रहती है, अन्‍य खाली पड़ी रहती हैं। कई पान की दुकान, चाय की दुकान, चाट की दुकान इतनी प्रसिद्ध हो जाती है कि वहां कूपन लेकर सामान लेना पड़ता है, ऐसा क्‍यों होता है?

सफलता बहुत-से अच्‍छे गुणों, लक्षणों का समग्र परिणाम है। सफलता एक व्‍यक्तिगत चीज़ भी है। आप किस उद्देश्‍य की प्राप्ति को सफलता मानते हैं यह आपकी पसन्‍द-नापसन्‍द, आपकी सोच, आपकी प्रकृति आपके संस्‍कार पर निर्भर है। कोई बहुत अधिक पैसा कमाने को ही सफलता मानता है। कोई जीवन में मानसिक शान्ति एवं इज्‍़ज्‍़त से जीवन-यापन को ही सफलता मानता है। कोई किसी खास पुरस्‍कार को प्राप्‍त करने को सफलता मानता है, कोई अपने एवं अपने परिवार के लिए अच्छी महँगी भौतिक सुविधाऍं जुटाने को ही सफलता मानता है, तो कोई राजनीति में सफलता मिलने को ही सफलता मानता है। वस्‍तुत: यह व्‍यक्तिगत सन्‍तुष्टि का एक बिन्‍दु है।

इसको संक्षिप्‍त में यह कहा जा सकता है कि जिस कार्य के पूर्ण होने से किसी को सन्‍तुष्टि मिलती है, उसे वह सफलता समझ सकता है। प्रत्‍येक व्‍यक्ति की सोच अलग होती है। उसकी योग्‍यता, क्षमता, कार्य-शैली इत्‍यादि अन्‍य से भिन्‍न होती है।

उसकी पसन्‍द-नापसन्‍द, अन्‍य से हटकर होती है, तो यह जानने के लिए कि सफलता कैसे मिलेगी, सर्वप्रथम स्‍वयं को जानने की, स्‍वयं के चारित्रक गुणों का स्‍व-परीक्षण करने की आवश्‍यकता है। आपकी अपनी सोच क्‍या है? किस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने से आपको सन्‍तुष्टि मिलती है। जो लक्ष्‍य आप पाना चाहते हैं क्‍या आप उसके अनुरूप प्रयास करने का आत्‍मविश्‍वास रखते हैं? क्‍या आपमें अपने लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने की योग्‍यता, क्षमता है। सोचता तो प्रत्‍येक व्‍यक्ति है कि वह सफल हो जाए, लेकिन जब राह में विभिन्‍न प्रकार की परेशानियों, विपदाओं, आकस्मिकताओं का सामना करना पड़ता है, तो विरले ही राह पर चलते हैं, अधिकांश लोग अपना रास्‍ता बदल लेते हैं। सफलता कैसे मिलेगी? इस प्रश्‍न का उत्‍तर जानने के लिए निम्‍न महत्‍वपूर्ण बिन्‍दुओं पर गौर करना होगा।

1. आपकी सोच, आपके विचार

जीवन में आप क्‍या बनना चाहते हैं, आप किन बुलन्दियों को छूना चाहते हैं, कौन-से शानदार कार्य को आप अंजाम देना चाहते हैं, यह आपकी सोच ( Your Thoughts ) एवं आपके विचारों का परिणाम है। सफलता, व्‍यक्ति की सोच की परिणति है। एक व्‍यक्ति का चरित्र, उसकी सोच एवं विचारों का समग्र प्रतिबिम्‍ब होता है।

सकारात्‍मक सोच आपका न केवल स्‍वयं पर विश्‍वास पैदा करती है बल्कि सकारात्‍मक सोच से आपको हर विरीत परिस्थितियों में भी आशा की किरणें दिखाई देती हैं। चारों तरफ़ विश्‍वास एवं अच्‍छा माहौल दृष्टिगोचर होता है। जबकि नकारात्‍मक सोच वाला व्‍यक्ति, नैराश्‍य से भरपूर रहता है, आत्‍मविश्‍वास की कमी एवं चारों तरफ़ उसे निराशाजनक स्थिति ही दृष्टिगोचर होती है। दृढ़ विचारों क व्‍यक्ति, अपने कार्य के प्रति ईमानदार एवं अपने वचनों का धनी होता है। वह एक बार जो कार्य करने की सोच लेता है। उसमें जी जान से जुट जाता है। ऐसे लोग अपने कार्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होते हैं एवं मेहनती होते हैं। सफलता स्‍वयं ऐसे व्‍यक्तियों के पास चलकर आती है।

अस्थिर विचारों वाले व्‍यक्ति, कुछ ढुल-मुल प्रवृत्ति के होते हैं। उनके विचारों में, उनकी सोच में दृढ़ता का अभाव एवं साहस की कमी, निर्णय में देरी या अधिकतर अपनी अस्थिर प्रवृत्ति के कारण अनिर्णय की स्थिति में रहते हैं।

पवित्र सोच एवं पुनीत विचारों के व्‍यक्ति ईश्‍वर में आस्‍था रखते हैं एवं हर कार्य को इस तरह से करना चाहते हैं कि दूसरों को नुकसान न हो। वे अपना कार्य पूरी ईमानदारी एवं निष्‍ठा से करते हैं। यद्यपि व्‍यावसायिक दृष्टि से ऐसे लोग चतुर, चालाक नहीं होने के कारण, बहुत व्‍यावहारिक नहीं कहे जाते हैं, लेकिन ऐसे व्‍यक्ति सफल होते देखे जाते हैं।

कहते हैं कि धूर्तता से एक बार आप सफलता प्राप्‍त कर सकते हैं, लेकिन स्‍थायी सफलता हेतु  जीवन में ईमानदारी एवं पवित्र विचारों का बहुत अहम् रोल होता है। जीवन में सफलता के लिए सकारात्‍मक सोच, दृढ़ता, स्‍वयं पर विश्‍वास एवं ईमानदारी का बहुत महत्‍व है एवं यह सब व्‍यक्ति के अच्‍छे सोच- विचारों की परिणति ही है।

”जीत और हार आपकी सोच पर निर्भर करती है मान लो तो हार होगी ठान लो तो जीत होगी”

2.स्‍वयं को पहचाने

सर्वप्रथम आवश्‍यकता है कि आप स्‍वयं को पहचाने। आप क्‍या चाहते हैं? आपकी इच्‍छा क्‍या है? ऐसा कौन-सा कार्य है, जिसके करने से आपको प्रसन्‍नता मिलती है? जो आपकी वास्तविक पसन्‍द है, जो आपकी रूचि का है। आपकी सोच क्‍या है? आपका ध्‍येय क्‍या है? आपका जीवन को समझने का दृष्टिकोण क्‍या है?

जैसा हमने पहले बताया है, कई व्‍यक्ति बहुत सारा पैसा कमाना चाहते हैं, तो कई शान्ति से, इज्‍जतदार व्‍यक्ति की तरह जीवन-यापन करना चाहते हैं। हर व्‍यक्ति की सोच, पसन्‍द-नापसन्‍द, जीवन का नजरिया, संस्‍कार अलग हैं। यह एक महत्‍वपूर्ण बिन्‍दु है। जब तक आप स्‍वयं को नहीं पहचानेंगे, आपको कौन-सा व्‍यवसाय चुनना चाहिए? इसका निर्णय नहीं कर पाऍगे? आप अपनें गुणों, अवगुणों, अपनी सामर्थ्‍य, अपनी कमजोरी का ईमानदारी से आकलन करें। कई व्‍यक्ति बिना इस बिन्‍दु पर विचार करे, अन्‍य की देखा-देखी कोई भी कार्य शुरू कर देते हैं, फिर असफल होकर नैराश्‍य में डूब जाते हैं।

हम ऐसे नौजवानों को भी जानते हैं जो गणित में बहुत कमजोंर होने के बावजूद इन्‍जीनियरिंग में प्रवेश ले लेते हैं। ऐसे भी नौजवान है जिनकी अंग्रेजी बहुत कमजोर हेाने के बावजूद वे कैट की या बैंक प्रोबेशनरी ऑफिसर्स की परीक्षा हेतु दूसरों की देखा-देखी नकल करते हुए आवेदन भेज देते हैं।

इसी प्रकार, यदि आप आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं हैं आप ऐसा व्‍यवसाय चुनते हैं, जिसमें बहुत पैसा चाहिए तो सफलता कैसे मिलेगी?

कई व्‍यक्तियों को व्‍यवसाय को झमेला बिल्‍‍कुल पसन्‍द नहीं आता, वे नौकरी करना ही पसन्‍द करते हैं। कई व्‍यक्ति प्रशासनिक नौकरी पसन्‍द करते हैं तो कई एमबीए करके प्रबन्‍धन की नौकरी के इच्‍छुक होते हैं। कई अध्‍यापक, लेक्‍चरर या बैंक की नौकरी को बहुत पसन्‍द करते हैं। अत: सर्वप्रथम आवश्‍यकता इस बात की है कि आप अपनी पसन्‍द-नापसन्‍द को समझें, जानें।

अपने गुण, अपनी सामर्थ्‍य, अपनी कमजोरी का पूरी ईमानदारी से, शान्‍त चित्‍त होकर मनन करें। इस सम्‍बन्‍ध में अपने बुजुर्गों से भी राय ले सकते हैं। अपने अच्‍छे शुभचिन्‍तक मित्रों से भी राय- मशविरा किया जा सकता है। लेकिन ध्‍यान रहे, आप का स्‍वयं का आकलन, आप से अच्‍छा कोई नहीं कर सकता है।

स्‍वयं को पहचानने के बाद, आपको क्‍या करना है, इसका सही, उचित निर्णय लेना सम्‍भव होगा। कई व्‍यक्ति अपने साथियों की समृद्धि को देखकर ठेकेदारी का कार्य शुरू कर देते हैं, कुछ ट्रेडिेंग का कार्य शुरू कर देते है, लेकिन यदि कार्य अपनी पसन्‍द का नहीं हों तो वे प्राय: असफल हो जाते हैं।

जीवन में सफलता, अपनी पसन्‍द के व्‍यवसाय, प्रोफेशन में ही सम्‍भव है, इस बात को बहुत अच्‍छी तरह समझ लेना चाहिए।

”दुनिया में सबसे ताकतवर चीज़, व्‍यक्ति के विचार हैं। सकारात्‍मक विचार से नई सोच-नई समझ बनती है एवं नकारात्‍मक विचारों से मन में विकार पैदा होते हैं।” विक्‍टर ह्यूगो

3.स्‍वयं को तैयार करें

स्‍वयं की रूचि, अभिरूचि, पसन्‍द-नापसन्‍द का सही आकलन करने के बाद, ज़रूरत है कि आप स्‍वयं को उस व्‍यवसाय/जॉब/नौकरी हेतु तैयार करें। मात्र यह पता लगाने से कि आपको पसन्‍द यह या वह है, सफलता नहीं मिल सकेगी। सफलता वैसे भी एक दिन, एक माह या कोई समयबद्ध कार्यक्रम नहीं है। सबसे बड़ी आवश्‍यकता है कि व्‍यक्ति इसके लिये स्‍वयं को तैयार करे।

अपनी कमज़ोरियों का निदान करे। अपने आत्‍मविश्‍वास को बनाए। जो कार्य आपने चुना है, जिस उद्देश्‍य को आप पाना चाहते हो, उसके लिए स्‍वयं को मानसिक रूप से तैयार करें। जो कार्य आपने चुना है, उसके लिए क्‍या-क्‍या आवश्‍यकता है, क्‍या-क्‍या पूर्व तैयारी आवश्‍यक है, इसका पता लगाएँ मानो आप प्रशासनिक सेवा में जाना चाहते हैं, तो आपको कौन-सा विषय लेना चाहिए, उसमें आपकी दक्षता कितनी है, कितने पेपर्स होते हैं, कब परीक्षा होती है? इन सब पर विचार करें। आपकी किसी विषय में खास कमज़ोरी है, तो उसे कैसे दूर कर पाओगे इस पर अच्‍छी तरह सोचें। ध्‍यान रखें, वर्तमान प्रतिस्‍पद्धा के युग में किसी भी पद हेतु चयन के लिए एक कठिन परीक्षा के दौर से गुज़रना पड़ता है। बहुत कड़ी मेहनत, लगन एवं लगातार प्रयास की आवश्‍यकता होती है।

इसी प्रकार आप कोई भी व्‍यवसाय करना चाहते हैं, तो आप व्‍यवसाय की पूरी जानकारी करें। अन्‍य कौन-कौन एवं कितने लोग उस व्‍यवसाय में संलग्‍न हैं, कितना लाभी होने की आशा करते हैं, नुकसान हुआ तो कितना हो सकता है, कितने धन की आवश्‍यकता होगी उसका प्रबन्‍ध कैसे होगा? इस तर‍ह की सभी बातों की जानकारी करं, स्‍वयं को तैयार करें। हर कार्य में समस्‍या आती है, लेकिन समाधान भी मिलता है। सोचें कि क्‍या समस्‍या आ सकती है, उसके समाधान हेतु पूर्वानुमान लगाने का प्रयास करें।

यह तैयारी आपको सफलता की ओर अग्रसर करती है। मात्र इच्‍छा करने से सफलता नहीं मिलती है। सफलता के लिए बहुत त्‍याग, तपस्‍या एवं पूर्ण मेहनत के साथ-साथ स्‍वयं को उत्‍कृष्‍टता के साँचे में ढालने की आवश्‍यकता है। सफल होने वाले हमारे आपके जैसे ही इन्‍सान होते हैं, लेकिन सफल वही होते हैं जो पूर्ण लगन, निष्‍ठा एवं समर्पण के साथ स्‍वयं को पूरे दम-खम से अपने लक्ष्‍य की प्राप्ति हेतु समर्पित कर देते हैं, इसलिए आवश्‍यक है कि आप स्‍वयं को इस तपस्‍या हेतु तैयार करें।

4.लक्ष्‍य तय करें

अपना लक्ष्‍य तय करें। लक्ष्‍य आपकी रूचि, आपकी योग्‍यता, क्षमता के अनुरूप होना चाहिए। उस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने हेतु प्रयास करें। ध्‍यान रखें, बिना लक्ष्‍य के जीवन उस बिना नाविक की नाव की तरह है जो मात्र हवा के झौंकों से कभी इस दिशा, कभी उस दिशा में चलती रहती है। लक्ष्‍य प्राप्‍त करना ही तो एक प्रकार से सफलता प्राप्‍त करना है। या यह कहें कि सफलता प्राप्‍त करने के लिए आपको एक लक्ष्‍य तय करना होगा। लक्ष्‍य क्‍या हो, यह आपकी योग्‍यता, क्षमता, आपकी इच्‍छाशक्ति पर निर्भर करता है। बड़े लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए छोटे-छोटे कई लक्ष्‍य निर्धारित किए जा कसते हैं। एक छोटे लक्ष्‍य की प्राप्ति सफलता प्राप्ति की दिशा में एक सकारात्‍मक कदम ही तो है। हर सफलता चाहे वह छोटी हो या बड़ी हो आपमें आत्‍मविश्‍वास एवं ऊर्जा का संचार करती है। लक्ष्‍य तय करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि आप अपनी ऊर्जा का एक निर्धारित दिशा में उपयोग कर सकते हैं। आपको पता होता है कि आपका उद्देश्‍य क्‍या है। आप निरूद्देश्‍य अपना समय एवं ऊर्जा व्‍यर्थ नहीं करते हैं।

”जीवन की त्रासदी यह नहीं कि आप अपने लक्ष्‍य तक नहीं पहुँच पाए, त्रासदी तो यह है कि आपके पास कोई लक्ष्‍य था ही नहीं।” बेन्‍जामिन मेस

एक सामान्‍य व्‍यावहारिक उदाहरण देखें

एक छात्र ने अपना लक्ष्‍य प्रशासनिक नौकरी पाने का बनाया है लेकिन वह पार्ट टाम जॉब भी करता है, ट्यूशन भी पढ़ाता है। इस तरह उसका समय तीन कार्यों में विभाजित हो जाता है। ऐसी स्थिति में उसे जितना समय प्रशासनिक सेवा की तैयारी में देना आवश्‍यक है, नहीं दे पाता। समय अभाव के कारण वह कोई अच्‍छी कोचिंग भी नहीं ले पाता है। परिणाम असफलता के अतिरिक्‍त क्‍या हो सकता है। ऐसा बहुत-से छात्रों के साथ होता है। अपना फोकस जब लक्ष्‍य पर केन्द्रित नहीं रख पाते हैं तो सफलता संदिग्‍ध है। जो व्‍यक्ति अपना कोई लक्ष्‍य निर्धारित नहंी करते हैं उनकी ऊर्जा, कई कार्यों में उपयोग आती है और वे व्‍यक्ति किसी भी कार्य में सफल नहीं हो पाते हैं।

”वे लोग जिनके लक्ष्‍य स्‍पष्‍ट होते हैं वे कम समय में, दूसरे लोग जितना सोच भी नहीं सकते, उससे कहीं अधिक सफलता प्राप्‍त करते हैं।’ ब्रायन ट्रेसी

5.समय-सीमा तय करें

इस बिन्‍दु का अभिप्राय है कि आपने जो भी लक्ष्‍य तय किया है, उसे प्राप्‍त करने की समय-सीमा तय करें। मात्र लक्ष्‍य तय कर लेने का कोई अर्थ नहीं। जब तक आप यह तय नहीं करते हैं कि उस लक्ष्‍य की पूर्ति कब तक की जानी है, तब तक आप उस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने हेतु गम्‍भीर नहीं हैं।

ऐसे बहुत से लोग हैं जो जीवन में करोड़पति बनने का लक्ष्‍य रखते हैं। ऐसे भी लोग हैं जो आईएएस बनने का लक्ष्‍य रखते हैं, लेकिन बिना समय-सीमा तय किए, वह लक्ष्‍य ही रहता है। सफलता के लिए आवश्‍यक है कि तय किए गए लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने की समय-सीमा तय की जाए। समय-सीमा तय करने के बाद आप अपनी पूरी योग्‍यता, क्षमता का उपयोग उस समय-सीमा में उस लक्ष्‍य को अर्जित करने में लगाने हेतु प्रोत्‍साहित होते हैं। यह आपका स्‍वयं का तय किया गया समय होता है। इसकी पूर्ति हेतु आप अपनी समस्‍त ऊर्जा को फोकस करते हैं। यह व्‍यक्ति का स्‍वयं का, स्‍वयं को दिया हुआ एक चैलेंज की तरह होता है।

आप एक बार तय कर लीजिए कि चाहे कुछ भी हो जाए मुझे अगले वर्ष की किसी अभीष्‍ट परीक्षा में सफल होना है तो आप उसके लिए स्‍वयं को तैयार करेंगे। आप अपने समय को व्‍यर्थ नहीं करेंगे। आप अपनी समस्‍त ऊर्जा को, इस ओर लगा देंगे। बस्‍तुत: व्‍यक्ति पूरी लगन एवं निष्‍ठा से अपने द्वारा निर्धारित लक्ष्‍य की पूर्ति का प्रयास तक ही शुरू करता है जब उसने एक समय सीमा को तय किया हो। जीवन में सफलता के लिए लक्ष्‍य प्राप्ति हेतु समय सीमा तय करना बहुत महत्‍वपूर्ण है।

”तन्‍हा बैठकर ना देख हाथें की लकीर अपनी उठ बाँध कमर और लिख दे खुद तकदीर अपनी”

6.लक्ष्‍य निर्धारण-आपकी क्षमता/योग्‍यता के अनुरूप

लक्ष्‍य आपकी योग्‍यता, क्षमता के अनुरूप हो। इसका अर्थ यह नहीं कि व्‍यक्ति अपनी योग्‍यता, क्षमता में वृद्धि नहीं कर सकता। अपनी दृढ़ इच्‍छाशक्ति के बल पर व्‍यक्ति हर असम्‍भव दिखाई देने वाला कार्य भी सम्‍भव कर सकता है, लेकिन व्‍यावहारिकता का तकाज़ा है कि आप जो भी लक्ष्‍य निर्धारित करते हैं वह आपकी वर्तमान योग्‍यता, क्षमता से बहुत बड़ा होगा तो आपको उस लक्ष्‍य से पहले, स्‍वयं को उत्‍कृष्‍ट बनाने का, लक्ष्‍य के अनुरूप स्‍वयं को बनाने का प्रथम सोपान पूरा करना होगा।

अधिकांश सफलता के सम्‍बन्‍ध में लिखी हुई किताबों में यह बिन्‍दु गौण कर दिया जाता है और यह तर्क दिया जाता है कि व्‍यक्ति की क्षमता, योग्‍यता अपरिमित है। व्‍यक्ति चाहे तो क्‍या नहीं कर सकता? व्‍यक्ति में दृढ़ विश्‍वास हो, दृढ़ निश्‍चय कर ले तो असम्‍भव कार्य को भी सम्‍भव कर सकता है।

एक सामान्‍य तैराक इंग्लिश चैनल पास करने का लक्ष्‍य तय करता है तो उसे उससे पूर्व कई छोटे-छोटे लक्ष्‍य पूरे करने होंगे। इतनी शक्ति स्‍वयं में पैदा करने के लिए, स्‍वयं को बड़ी मेहनत करके, शरीर को इतना योग्‍य बनाना होगा कि बह इंग्लिश चैनल को पार करने योग्‍य बन सके। कोई भी व्‍यक्ति बिना पहली दूसरी सीढि़यॉं चढ़े, ऊपर की सीढ़ी तक नहीं पहुँच सकता।

सफलता लगातार प्रयास का परिणाम है। लक्ष्‍य तय करते समय, अपने मानसिक स्‍तर, शारीरिक स्‍तर एवं आर्थिक स्‍तर का ईमानदारी से आकलन अवश्‍य करें। यदि लक्ष्‍य निर्धारण में आर्थिक समस्‍या है तो इसका पूर्व निदान करना आवश्‍यक है, क्‍योंकि वित्‍त की समस्‍या का उचित एवं समय पर निदान नहीं होने पर व्‍यक्ति की साख बिगड़ जाती है, जिसे वापस बनाने में बहुत कठिनाई होती है।

मानसिक एवं शारीरिक स्‍तर का अर्थ आपकी मानसिक एवं शारीरिक क्षमताओं को ध्‍यान में रखते हुए, लक्ष्‍य को तय करने से है। कमज़ोर शरीर का व्‍यक्ति पहलवान बनने का लक्ष्‍य तय करे, इसी प्रकार एक औसत अंक प्राप्‍त करने वाला छात्र कैट में 100 परसेन्‍टाइल लाने का लक्ष्‍य तय करे तो यह अव्‍यावहारिक लक्ष्‍य होगा। ऐसी गलती न करें।

आप में दृढ़ निश्‍चय करने की क्षमता है, आप में कुव्‍वत है कि एक बार ठान लिया तो उस काम को हर हालत में पूरा करके ही दम लेंगे, लेकिन हर व्‍यक्ति की कुछ सीमाएं भी हैं , व्‍यक्ति 100 करोड़ का प्रोजेक्‍ट लगाना चाहता है, उसके पास अभी मात्र 50 लाख रूपये हैं तो शेष राशि का प्रबन्‍ध करना हर व्‍यक्ति के बस की बात नहीं है।

इसी प्रकार आप किसी खेल में स्‍वर्ण पदक जीतना चाहते हो, लेकिन आपके पास अन्‍य देश के खिलाडि़यों जैसी सुविधाऍं नहीं हैं, कोच नहीं हैं, उपकरण नहीं हैं, तो आपको उस स्‍तर तक पहुँचने में बहुत अधिक प्रयास करने होंगे। उसमें भी बहुत-सी परेशानियॉं/समस्‍याऍं आती हैं।

कहने का मतलब है अपने लक्ष्‍य का निर्धारण अपनी क्षमता, योग्‍यता तथा साधनों की उपलब्‍धता का ईमानदारी से आकलन करने बाद, उनके अनुरूप करने पर सफलता की सम्‍भावना बढ़ जाती है।

”अच्‍छे इन्‍सान सिर्फ और सिर्फ अपने कर्म से पहचाने जाते हैं, क्‍योंकि…… अच्‍छी बातें तो बुरे लोग भी कर लेते हैं।”

7.लक्ष्‍य के प्रति पूर्ण समर्पण

लक्ष्‍य तय कर लेना, योजना बना लेना, सब कुछ एक सैद्धान्तिक प्रक्रिया है। मुख्‍य बिन्‍दु है क्रियान्‍वयन (Implementation) का। इसी से पता चलता है कि आपमें कितनी इच्‍छाशक्ति है, कितनी लगन, निष्‍ठा है, कितना दम है। आप और हम जानते हैं, अपने आस-पाास देखते हैं कि हर व्‍यक्ति सफल होना चाहता है, हर व्‍यक्ति कुछ व्‍यवसाय करता है।

परीक्षा में हज़ारों अभ्‍यर्थी बैठते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही लोगों को मिलती है। कुछ ही अभ्‍यर्थी सफल हो पाते हैं। ऐसा क्‍यों? सफल होने वाले व्‍यक्ति असफल होने वाले व्‍यक्तियेां से संख्‍या में बहुत कम होते हैं? सब ही तो कुछ-न-कुछ लक्ष्‍य रखते हैं, सब ही कुछ-न-कुछ प्‍लानिंग करते हैं, सब ही सफलता के दिवाने होते हैं?

वा‍स्‍तविकता यह है कि असफल होने वाले लोगों का लक्ष्‍य के प्रति पूर्ण समर्पण नहीं होता। आधे-अधूरे मन से कार्य को अंजाम देते हैं। सफलता के लिए जिस दृढ़ता की, इच्‍छाशक्ति की, अनुशासन की, कार्य को हर हालत में पूरा करने के जज्‍बे की आवश्‍यकता होती है, उसका असफल होने वाले लोगों में नितान्‍त अभाव होता है।

आपने किसी टॉपर छात्र का साक्षात्‍कार पढ़ा है। वे नियमित रूप से पढ़ाई करते हैं। उनका ध्‍येय मात्र कोर्स पूरा करना नहीं, बल्कि कई बार रिवीज़न करके उत्‍कृष्‍टता की वह श्रेणी हासिल करना हाता है, जो उन्‍हें टॉपर में स्‍थान दिलाती है।

सफलता की बुलन्दियॉं छूने वाला हर शख्‍स, सफलता के लिए अपने लक्ष्‍य के प्रति पूर्ण समर्पित होता है। उसका हर कदम, अपने लक्ष्‍य की प्राप्‍ति के लिए होता है। उसकी सेाच में हर हालत में लक्ष्‍य को हासिल करने का जज्‍बा होता है। जब तक आपका पूरा फोकस/समर्पण अपने लक्ष्‍य के प्रति नहीं होगा, तब तक आपकी सूरी योग्‍यता, क्षमता एवं ऊर्जा उस दिशा में कार्य नहीं कर सकती, ऐसी स्थिति में आप कोई उल्‍लेखनीय सफलता हासिल कर सको यह सम्‍भव नहीं हो पाएगा।

सफलता-संघर्ष की गाथा है। सफलता के मार्ग में बहुत-सी हठिनाइयॉं, रूकावटें आती हैं, यह निर्विवाद है। कमज़ोर लोग इसीलिए अपनी राह बदल लेते हैं। बिना अपनी योग्‍यता, क्षमता को पूरी तरह लक्ष्‍य के अर्जन हेतु एकाग्र किए, सफलता प्राप्‍त करना वर्तमान प्रतिस्‍पर्द्धा के युग में सम्‍भव प्रतीत नहीं होता है।

उचित लक्ष्‍य का निर्धारण एवं उस लक्ष्‍य की प्राप्ति हेतु अपनी योग्‍यता, क्षमता का उस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने हेतु पूरा फोकस यदि कर दिया जाए तो सफलता मिलती ही है, ऐसा हमारा विश्‍वास है।

”मेरी मंजिल मुझे मिलेगी इसका मुझे अहसास है संदेह नहीं मुझे अपने इरादों पर ये मेरी सोच और हौसलों का विश्‍वास है।”

8.योजना बनाएँ

लक्ष्‍य तय करने के बाद, लक्ष्‍य की समय-सीमा तय करने के बाद, सबसे महत्‍वपूर्ण बात है कि आप अपने लक्ष्‍य को स्‍वयं द्वारा निर्धारित समय सीमा में प्राप्‍त करने हेतु योजना बनाएँ। स्‍वयं को तैयार करें, देखें कि कब-कब, क्‍या-क्‍या कार्य होना है? आपको एक रणनीति तैयार करनी होगी। यदि आप एक कम्‍पनी के मालिक हैं, आपने लक्ष्‍य निर्धारित किया है कि दो वर्ष में कम्‍पनी की बिक्री वर्तमान से दोगुनी करनी है तो आपको इसके लिए, एक योजना तैयार करनी होगी। स्‍टाफ को तैयार करना होगा, उनके विचार जानने होंगे, उनके भी व्‍यक्तिगत टारगेट तय करने होंगे। उनको प्रोत्‍साहन हेतु कुछ अवार्ड्स/रिवार्ड्स/डिस्‍काउण्‍ट/कमीशन तय करना होगा।

डीलर्स को प्रोत्‍साहित करने हेतु ललग से कमीशन/डिस्‍काउण्‍ट की स्‍कीम तैयार करनी होगी। आपकी कम्‍पनी का प्रोडेक्‍ट बाज़ार में स्‍वीकार किया जाए, इसके लिये विज्ञापन इत्‍यादि तैयार करने होंगे। आपके प्रोडक्‍ट की क्‍वालिटी भी अच्‍छी बनी रहे, इसका ध्‍यान रखना होगा। साथ ही प्रोडक्‍ट के उत्‍पादन में वृद्धि हेतु आवश्‍यक तैयारी करनी होगी। यह सब पूरी योजना बनाकर ही सम्‍भव है। सही, उत्‍कृष्‍ट योजना आपको सफलता की ओर सग्रसर करती है। किसी भी व्‍यवसाय में सफलता हेतु पूर्व में योजना बनाना हमेशा लाभदायक होता है। वैसे भी जीवन के हर कार्य में भी योजना बनाना, उचित रहता है। इससे गलती होने की सम्‍भावना कम रहती है।

हर कार्य सही समय पर लक्ष्‍य के अनुरूप चलता रहता है। ऊर्जा एवं श्रम की बचत होती है। आर्थिक रूप से योजनाबद्ध कार्य हमेशा फलदायी होता है। किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए योजना बनाने से आप अपने पास उपलब्‍ध साधनों का भरपूर उपयोग कर पाने में सफल रहते हैं। आपाधापी में, बिना योजना के लिए गए कार्य से सफल होने की आशा नहीं करनी चाहिए। योजना से आपको एक विश्‍वास मिलता है जो सफलता हेतु बहुत आवश्‍यक है।

इसी प्रकार आप किसी अभीष्‍ट परीक्षा में सफल होने का लक्ष्‍य तय करते हैं तो आपको इसके लिए भी योजना बनानी होगी। अपना पढ़ाई का टाइम टेबल तैयार करना हेागा। अभीष्‍ट परीक्षा के प्रश्‍न-पत्र कौन-कौन से हैं, किस प्रकार के प्रश्‍न (Objective-Descriptive) पूछे जाते हैं। उनका स्‍तर क्‍या है? परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्‍न-पत्रों के अनुसार आपको योजना बनाकर तैयारी करनी होगी।

आप किस विषय में प्रवीण हैं, किस विषय में कमज़ोर हैं, इन सारी बातों का ध्‍यान करके, पहले से ही तैयारी करनी आवश्‍यक है। रिवीज़न के लिए भी समय बचाना आवश्‍यक है। ये सब बिन्‍दु, आपकी सफलता के लिए बनाई जाने वाली योजना, रणनीति का हिस्‍सा है।

”जब आप किसी कार्य की शुरूआत करें, तो असफलता से नहीं डरें, और उस कार्य को छोड़े नहीं। जो लोग ईमानदारी से कार्य करते हैं अन्‍तत: वे ही सफल होते हैं।”

प्राथमिकताएँ तय करें

किसी भी व्‍यवसाय, किसी भी प्रोजेक्‍ट में एकसाथ बहुत से कार्यों को पूरा किया जाना होता है। व्‍यक्ति बहुत कन्‍फ्यूज़ (Confuse) हो जाता है। ऐसी स्थिति में कार्यों की प्राथमिकताएँ उनके महत्‍व को देखते हुए तय करना बहुत जरूरी है। जिस काम का जितना अधिक महत्‍व है, उसे पहले, जिस कार्य को दो दिन के लिये विलम्बित किया जा सकता है, उसे दो दिन बाद, जिसे एक सप्‍ताह के लिए विलम्बित किया जा सकता है उसे एक सप्‍ताह बाद करने की प्राथमिकता पर रखें। यह बहुत महत्‍वपूर्ण बिन्‍दु है।

जीवन में उचित प्रा‍थमिकता तय करना, न केवल व्‍यक्तिगत् सफलता के लिए, बल्कि किसी भी व्‍यवसाय की सफलता के लिए बहुत आवश्‍यक है। यदि हम महत्‍वपूर्ण प्राथमिकताओं को बाद में एवं कम महत्‍वपूर्ण प्राथमिकताओं को पहले पूर्ण करने की गलती करते हैं तो अधिक महत्‍वपूर्ण कार्यों के लिए, न समय बचेगा और न ही धन एवं व्‍यवसाय का सारा ढाँचा चरमरा जाएगा। इसके लिए एक बहुत ही शानदार उदाहरण दिया जाता है, जिसे हम संक्षेप में यहाँ प्रस्‍तुत कर रहे हैं।

एक बार एक प्रोफेसर एक कक्षा में एक प्रैक्टिकल द्वारा कार्यों की प्राथमिकताओं के सम्‍बन्‍ध में बता रहे थे। उन्‍होंने एक जार लिया और उसमें कुछ मोट-मोटे पत्‍थर के टुकड़े डालकर उस जार को भर दिया। फिर छात्रों से पूछा कि जार भर गया क्‍या? छात्रों ने जवाब दिया हाँ जी, भर गया।

अब प्रोफेसर महोदय ने उस जार में कुछ छोटे-छोटे कंकर डाले और फिर पूछा कि जार भर गया क्‍या?

छात्रों की समझ में नहीं आया कि प्रोफेसर महोदय क्‍या कहना/पूछना चाहते हैं? अब प्रोफेसर महोदय ने उस जार को पानी से भर दिया। प्रोफेसर ने बताया कि सबसे बड़े पत्‍थर सबसे महत्‍वपूर्ण प्राथमिकताएँ हैं।

यदि इनका समाधान सबसे पहले नहीं किया जाए तो बाद में इनके लिए स्‍थान ही नहीं है। छोटे कंकर-दूसरी महत्‍वपूर्ण प्रा‍थमिकताएँ हैं एवं रेत-तीसरी महत्‍वपूर्ण प्राथमिकताएँ हैं। यदि रेत को पहले महत्‍व दे दिया जाता तो इससे अधिक महत्‍वपूर्ण प्राथमिकताएँ कंकरों के लिए स्‍थान ही नहीं बचता है। अत: अपनी प्राथमिकताओं का उनके महत्‍व के अनुसार समाधान करना, किसी भी व्‍यवसाय या व्‍यक्तिगत सफलता के लिए आवश्‍यक है।

”शिकायत करना सरल है लेकिन स्‍वयं के पैरों पर उठना और खड़े होना कठिन है। पर जब हम ऐसा करते हैं एवं स्‍वयं का मूल्‍यांकन करते हैं तो हम अपने आप को सफलता की बुलन्दियों को छूने के काबिल बना लेते हैं।”

अपनी योग्‍यता, क्षमता पर विश्‍वास रखें

सफलता के लिए सबसे अधिक महत्‍वपूर्ण तत्‍व है स्‍वयं पर विश्‍वास। स्‍वयं की योग्‍यता, क्षमता पर विश्‍वास। बिना इस विश्‍वास के आप कुछ भी नहीं कर सकते। यदि आपका स्‍वयं की योग्‍यता, क्षमता पर विश्‍वास नहीं है तो आप न कोई निर्णय ले सकते हैं, न आप कोई योजना बना सकते हैं, न कोई लक्ष्‍य निर्धारण कर सकते हैं और न ही स्‍वयं को संघर्ष के लिए तैयार कर सकते हैं।

आपकी इच्‍छाशक्ति, लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने का जज्‍बा, सफलता के रास्‍ते में आने वाली विपदाओं का सामना करने की शक्ति तब ही कारगर होगी, जब आप स्‍वयं की योग्‍यता, क्षमता में विश्‍वास रखते हों। बिना स्‍वयं पर विश्‍वास के सफलता की राह का एक पड़ाव भी पार करना मुश्किल कार्य है। बिना आत्‍मविश्‍वास के मिला हुआ प्रतिफल, एक लॉटरी या भाग्‍य का ही परिणाम हो सकता है, इसे सफलता का पड़ाव कहना अनुपयुक्‍त होगा। हर सफल व्‍यक्ति आनी योग्‍यता, क्षमता के बल पर ही आगे बढ़ पाया है।

दूसरों के सहारे भी वही बढ़ सकता है जिसमें स्‍वयं में कुछ कुव्‍वत हो। कड़ी मेहनत का जज्‍बा, परेशानियों में विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखना एवं पूरी दृढ़ता के साथ आगे गढ़ने के लिए स्‍वयं पर विश्‍वास होना आवश्‍यक है।

यह विश्‍वास ही, अपने सहकर्मियों में ऊर्जा का संचार करता है। यदि आप स्‍वयं ढुलमुल हैं तो आपके सहकर्मी तो आपसे पहले ढुलमुल हो जाएँगे। आपकी नेतृत्‍व क्षमता आपकी स्‍वयं की योग्‍यता, क्षमता का ही तो परिणाम है।

”मंजिलें इंसान के हौसले आज़माती हैं, सपनों के परदे आँखों से हटाती है। किसी भी बात से हिम्‍मत मत हारना, ठोकरें ही इन्‍सान को चलना सिखाती हैं।”

11.चुनौतियों का सामना करें

सफलता की राह आसान नहीं है। सफलता के राही को बार-बार विभिन्‍न प्रकार की चुनौतियो का सामना करना पड़ता है। सफल वही होता है जो किसी भी प्रकार की चुनौनियों का बहुत धैर्य से, साहस से एवं चतुराई से मुकाबला करता है एवं उनको समय पर दूर करने का प्रयास करता है। चुनौतियों का सामना करते समय आपको बहुत विनम्र होने की, बहुत धैर्य रखने की आवश्‍यकता है।

कई बार बिना कारण के व्‍यवसाय में नुकसान हो सकता है। कई बार आपका पार्टनर आपका साथ छोड़ सकता है, कई बार विशेष कर्मचारी आपको छोड़कर जाने को तैयार हो सकता है। ऐसी कितनी ही परिस्थितियाँ आ सकती हैं। ये सफलता के मार्ग की ऐसी चुनौतियाँ हैं, जो हर व्‍यक्ति को किसी-न-किसी रूप में झेलनी पड़ती हैं।

ऐसे बहुत से व्‍‍यक्ति हैं जिन्‍हें शुरूआत में या यह कहें कि सफलता के सफर में कितनी ही बार, विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है लेकिन जो व्‍यक्ति धैर्य के साथ पूर्ण समर्पित होकर अपने लक्ष्‍य की पूर्ति में तत्‍पर रहता है, वह अवश्‍य सफलता प्राप्‍त करता है।

”खुद पर भरोसे का हुनर सीख लो दोस्‍तों, सहारे कितने भी सच्‍चे हों, साथ छोड़ ही जाते हैं।”

12. स्‍वयं की कमज़ोरियों का ईमानदारी से आकलन करें

देख गया है कि अपनी असफलता के लिए व्‍यक्ति हमेशा किसी अन्‍य परिस्थिति या भाग्‍य/दुर्भाग्‍य को जिम्‍मेदार ठहराने का हर सम्‍भव प्रयास करता है। कोई-न-कोई सरल सा बहाना बनाकर वह बचना चाहता है।

आजकल भ्रष्‍टाचार, आरक्षण भी कारण हो गए हैं जिन्‍हें व्‍यक्ति अपनी असफलता हेतु जि़म्‍मेदार ठहराने का प्रयास करते हैं, लेकिन वास्‍तविकता तो अधिकांशतया यह होती है कि हमारी असफलता के लिए हम ही सबसे ज्‍़यादा जि़म्‍मेदार हैं।

हम एक बात पूछना चाहते हैं, क्‍या जिस परीक्षा/क्षेत्र में आप सफलता/असफलता की बात कर रहे हैं, वहॉं अन्‍य कोई सफल हुआ है या नहीं। यदि अन्‍य कोई सफल हुआ है तो आप क्‍यों नहीं?

यह हम मान सकते हैं कि कई बार कोई सरकारी नीति में हुए किसी बदलाव से आप सफलता से वंचित रह गए हों, लेकिन यह एक अपवादस्‍वरूप घटना हो सकती है।

आप किसी अभीष्‍ट परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन आप एक पेपर की तैयारी पूरी नहीं कर पाए या आप किसी विषय का पेपर देने गए तो उस पेपर मे ंउन दो चैप्‍टर में से ही तीन प्रश्‍न आ गए जिन्हें आप महत्‍वहीन समझकर छोड़ गए, ऐसी स्थितियों के कारण असफलता के लिए कौन जि़म्‍मेदार है?

कई अभ्‍यर्थी, केवल एक बुक पढ़कर ही सफलता अर्जित करना चाहते हैं। कई पिछले पॉंच वर्षों के पेपर्स की तैयारी करके ही सफल होना चाहते हैं।

इसी प्रकार कई बार आप जब नया व्‍यवसाय शुरू करते हैं तो उसकी पूरी जानकारी नहीं करके मात्र अन्‍य की देखा-देखी उस व्‍यवसाय को अपना लेते हैं और फिर असफलता के लिए भाग्‍य/दुर्भाग्‍य को जिम्‍मेदार ठहराते हैं। सारी बातों का अर्थ है कि आपको अपनी कमज़ोरियों का सही आकलन नहीं करने पर सफलता मिलना असम्‍भव नहीं तो कठिन अवश्‍य है।

”दीपक सोने का हो या मिट्टी का मूल्‍य उसका नहीं होता। मूल्‍य होता है उसकी लौ का, लौ(रोशनी) जो अन्‍धकार को दूर करे।”

13. अपनी गलतियों से सीखें

जब हम किसी कार्य को करते हैं तो गलतियाँ होना कोई असामान्‍य बात नहीं है। गलतियाँ तभी होती हैं, जब हम कुछ करते हैं। वस्‍तुत: गलतियाँ हमें सुधरने का मौका देती हैं। गलतियाँ हमारे अनुभव को परिपक्‍व बनाती हैं, हमारी सूझबूझ एवं कार्यप्रणाली में प्रखरता लाती हैं।

गलतियों से हमें निराश होने की या दु:खी होने की कोई आवश्‍यकता नहीं है, ऐसी सामान्‍य घटनाएँ होंगी ही। कई व्‍यक्ति भूतकाल की गलतियों से इतने आहत होते हैं कि हमेशा उनका ही जि़क्र किया करते हैं। ऐसा करने का कोई लाभ नहीं। वर्तमान में जीना सीखें एवं पुरानी गलतियों को ना दोहराएँ ऐसा सुप्रयास करें।

गलतियों से हमें सबक लेना चाहिए। हमारी कार्य प्रणाली में आवश्‍यक परिवर्धन, परिवर्त्तन की सीख, गलतियों से ही मिलती है, लेकिन बार-बार एक ही प्रकार की गलतियाँ करना भी गलत है। आपको यह नहीं समझना चाहिए कि आप जो कर रहे हैं वह गलत नहीं हो सकता।

वस्‍तुत: हमें गलतियों से अपने कार्य करने के तरीकों, कार्यप्रणाली, व्‍यवहार में कमी का अहसास होता है और यदि आपने उसमें उचित सुधार कर लिया तो सफलता सुनिश्चित हो जाती है।

”इन्‍सान एक दुकान है और जुबान उसका ताला। ताला खुलता है, तभी मालूम होता है कि दुकान सोनी की है, या लोहे की है।”

14.परिस्थितियों के अनुरूप स्‍वयं को ढालें

सफलता के लिए सबसे आवश्‍यक है कि जो भी परिस्थिति है, उसके अनुरूप स्‍वयं को ढालें एवं अपनी पूरी योग्‍यता, क्षमता के साथ अपनी सम्‍पूर्ण ऊर्जा अपने लक्ष्‍य को पाने हेतु लगा दें। परिस्थितियों का अर्थ है कि आप एक पैर से अपंग हों, हो सकता है आपका एक हाथ ठीक से काम न करता हो।

ऐसी कुछ भी परिस्थिति है तो उस अपंगता के कारण स्‍वयं पर तरस नहीं खाना चाहिए, बल्कि उस अपंगता की पूर्ति करने हेतु अधिक उत्‍साह, अधिक ऊर्जा के साथ, अधिक कठिन मेहनत करने की आवश्‍यकता है। इतिहास में ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं। जब ऐसे निशक्‍त व्‍यक्तियों ने सफलता का परचम लहराया है। कहते हैं कि पुरूषार्थ के समक्ष दुर्भाग्‍य भी नतमस्‍तक हो जाता है एवं सफलता उनका वरण करती है।

ऐसे बहुत-से छात्रों को आप जानते होंगे जिन्‍हें दो जून की रोटी नसीब नहीं होती थी। कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर, स्‍कूल/कॉलेज जाना पड़ता था लेकिन अपनी लगन एवं मेहनत के बल पर उन्‍होने सफलता अर्जित की। हमारे पूर्व प्रधानमंत्री स्‍व. लाल बहादुर शास्‍त्री गली में लैम्‍प पोस्‍ट के नीचे पढ़ाई करके आगे बढ़े और एक दिन हमारे देश के महान् प्रधानमन्‍त्री बने।

वस्‍तुत: सफलता के लिए विकट/विषम परिस्थितियाँ मार्ग को अवरूद्ध नहीं करती हैं। यदि व्‍यक्ति में जुनून हो, स्‍वयं पर विश्‍वास हो, कठोर मेहनत करने का जज्‍बा हो तो हर विषम परिस्थितियाँ आपके सामने नतमस्‍तक हो जाती हैं। कई सन्‍दर्भ में तो ये विषम परिस्थितियाँ आपको संघर्षशील होकर अधिक उत्‍साह, जोश एवं ऊर्जा से आगे बढ़ने को प्रेरित करती है।

”एल्‍पस पर्वतमाला की घाटी का सर्वे करके लौटे नेपोलियन के इन्‍जीनियर्स ने उसे बताया कि यह रास्‍ता पार करना सेना के लिए शायद सम्‍भव नहीं होगा। यह सुनकर नेपोलियन अपने साठ हज़ार सैनिकों को लेकर, पूरे लाव-लश्‍कर के साथ उस घाटी को पार कर गया। दुनिया देखती रह गई, उस नाटे कद के नेपोलियन के साहस एवं दृढ़ इच्‍छाशक्ति को। नेपोलियन विपरीत परिस्थितियों में अवसर ढूँढकर उसे अपने अनुकूल ढालने में प्रवीण था”

15. अवसर को पहचानें, अवसर पैदा करें

जीवन में संघर्ष के दौरान कई अच्‍छे अवसर मिलते हैं, जिन्‍हें यदि आपने समझ लिया एवं उसका लाभ उठा लिया तो जीवन का स्‍वरूप ही बदल जाता है। इसके लिए चाहिए होती है पारखी नज़र। जब कभी अवसर मिलता है तो उसके साथ ‘वर्तमान’ को त्‍यागने की ‘रिस्‍क’ संलग्‍न रहती है। सफलता के मार्ग में ऐसी रिस्‍क एक सामान्‍य-सी बात है और व्‍यक्ति को केलकुलेटेड रिस्‍क (Calculated Risk) लेने में हिचक भी नहीं होनी चाहिए। आज का समय तो यह है कि अवसरों को पैदा किया जाए। ऐसी स्थिति बनाई जाए कि अवसर स्‍वयं आपके सामने दिखाई देने लगे।

इसका अर्थ है नवीन विचार (New Ideas) का विकास एवं उसमें स्‍वयं के लाभ को तलाशना है। आपके विचारों में इस तरह की प्रवरता एवं प्रखरता होनी चाहिए। आपके आईडियाज ऐसे होने चाहिए कि सभी उन्‍हें पसन्‍द करें एवं यही आपको अवसर मिलता है। ये अवसर आपको पैदा करने हैं। यह टीनएजर्स का युग है। आप जो भी व्‍यवसाय स्‍थापित करते हैं उसका फोकस जो भी वर्ग है, वह वर्ग आपके उत्‍पादन को पसन्‍द करने वाला होना चाहिए।

आज बड़ी-बड़ी कम्‍पनियाँ पुराने व्‍हीकल, पुराना सामान बेचकर पैसे कमा रही हैं। ऐसी इन्‍टरनेट साइट्स उलपब्‍ध हैं, जहाँ आप पुराना सामान बहुत आराम से बेच सकते हैं। आज व्‍यक्ति को सुविधा चाहिए और वह सुविधा वह उचित दामों पर चाहता है एवं उसकी विश्‍वसनीयता भी होनी चाहिए। आप यह सब करने का तरीका ढूँढ सकते हो तो आप अपने लिए अवसर पैदा कर रहे हो, तब सफलता आपको वरण अवश्‍य करेगी।

”एक शहर को जीतने के बाद सिकन्‍दर से किसी ने पूछा, यदि अवसर मिलता तो क्‍या आप दूसरा शहर भी जीतना चाहेंगे? सिकन्‍दर ने कहा, ‘अवसर’, यह क्‍या होता है? अवसर तो मैं तैयार करता हूं।”

16. दूसरों की हू-ब-हू नकल न करें

‘सफलता’ पर लिखी हुई अधिकांश किताबों में लिखा होता है कि दूसरों की नकल न करें। हमारा कहना है कि व्‍यक्ति दूसरों को देखकर ही उसके जैसी सफलता पाना चाहता है। दूसरों की खुशहाली, व्‍यापार में प्रगति देखकर ही तो वह उस कार्य को करने को प्रेरित होता है।

नकल तो व्‍यक्ति की प्रवृत्ति है, लेकिन कहते हैं कि नकल के लिए भी अक्‍ल की आवश्‍यकता होती है। अत: सर्वप्रथम ध्‍यान रखें की दूसरों की हू-ब-हू नकल कभी न करें। आप दूसरों से सीखें, चाहे आप किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों या किसी व्‍यवसाय में कदम रखना चाहते हों।

अपने साथियों, सहकर्मियों, अन्‍य व्‍यवसायियों के गुणों को आत्‍मसात् करने का प्रयास करें। बहुत-से छात्र किसी परीक्षा हेतु, दूसरे छात्र की देखा-देखी फार्म भर देते हैं। अन्‍य छात्रों की नकल करते हुए, बिना स्‍वयं ठीक तरह से जानकारी किए कोचिंग में भी प्रवेश ले लेते हैं।

कई तो किताबें भी अन्‍य छात्रों की नकल कर खरीद लेते हैं। कई छात्र तो दूसरे छात्र को देखकर नोट्स बनाना शुरू कर देते हैं। कई छात्र दूसरे छात्रों को देखकर रात में देर तक पढ़ना एवं सुबह देर से उठना शुरू कर देते हैं, कई सुबह जल्‍दी उठना एवं राज को जल्‍दी सोना शुरू कर देते हैं।

हर छात्र की अपनी विशिष्‍टता होती है। किसी को रात मे जल्‍दी सोने की आदत होती है, तो किसी को देर से सोने की। इसी प्रकार से कई बच्‍चे नोट्स बनाकर पढ़ने में कुशल होते हैं और वे बहुत पहले से इस कार्य में लग जाते हैं।

नोट्स बनाना, एक बड़ी कुशलता का कार्य है। कई बच्‍चों को चुपचाप पढ़ने की आदत होती है तो कई म्‍यूजिक सुनते हुए पढ़ना चाहते हैं। अर्थ हुआ कि हर छात्र की अपनी विशेषता, विशिष्‍टता होती है। अत: हू-ब-हू नकल कने से वह मानसिक रूप से अस्‍त-व्‍यस्‍त हो सकता है।

इसी प्रकार किसी भी व्‍यवसाय में आप दूसरे से सापेक्षतया अच्‍छा करने का प्रयास करें। आप अन्‍य से अच्‍छा प्रोडक्‍ट लाएँ, कुछ नया करें। आप अन्‍य से अच्‍छा प्रोडक्‍ट लाएँ, कुछ नया करें। अपनी विशिष्‍टता पैदा करें, सफलता मिलेगी।

यदि आप मात्र दूसरों की हू-ब-हू नकल करते रहे तो आपका प्रोडक्‍ट डुप्लीकेट की तरह माना जायेगा एवं मूल प्रोडक्ट ओरिजनल माना जाएगा। आवश्‍यकता है कि धैर्य से सोचें और ऐसा कार्य करें जो अन्‍य से श्रेष्‍ठ एवं मौलिक हो, सफलता मिलेगी।

”पुरूषार्थी वह नहीं जो अवसर का इन्‍तज़ार करते हैं, अपितु वे हैं जो अवसर को अपने अधीन रखते हैं। वे स्‍वयं अवसर के अधीन नहीं होते हैं।’ -चेपीन

17. अन्‍य की सफलताओं/असफलताओं से सीखें

अंग्रेज़ी का एक कथन है……

“Smart people learn from their own mistakes but the real sharp ones learn from the mistakes of others.”

अर्थात् जो स्‍मार्ट व्‍यक्ति होते हैं वे स्‍वयं की गलतियों से सीखते हैं, लेकिन जो वास्‍तव में होशियार होते हैं वे दूसरों द्वारा की गई गलतियों से सीखते हैं। हर व्‍यक्ति के िजीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं। कई प्रकार की गलतियाँ जाने-अनजाने व्‍यक्ति करता है। अत: जो व्‍यक्ति जागरूक रहता है, वह दूसरों की सफलता एवं असफलताओं से सबक लेता है और आगे बढ़ता है।

यदि आप छात्र हैं जो आपको सफल छात्रों से सफल होने के गुरुमन्‍त्र मिल सकते हैं। एक सफल होने वाला छात्र आपको यह भी बता सकता है कि असफल होने के क्‍या कारण है या सफल होने के लिए किन चीज़ों को अपनाना चाहिए एवं किन चीज़ों से दूर रख्हना चाहिए।

आप नौकरी में हैं और किसी लोभ/लालच में आकर गलत कार्य कर लेते हैं तो आप अपना भविष्‍य दाँव पर लगाते हैं। नौकरी में आगे बढ़ने वालों से आपको सफल होने के गुरुमंत्रों का भी ज्ञान हो जाता है। आप किसी भी व्‍यवसाय में हैं, आपको सफल होने के लिए दूसरों के गुणों को आत्‍मसात् करना चाहिए। आपका व्‍यवहार अच्‍छा है, तो आपको अच्‍छे मार्गदर्शक मित्र मिल सकते हैं, जो आपको सफल होने हेतु क्‍या आवश्‍यकता है, इसके बारे में पूरा मार्गदर्शन कर सकते हैं, साथ ही आपको उन गलतियों के बारे में बता सकते हैं जिनके कारण उन्‍हें भी अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कहते हैं

“Learn from the mistakes of others, you can never live long enough to make them yourself.”    –Chanakya

अर्थात् दूसरों द्वारा की गई गलतियों से सीखें। अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को अपनी उम्र कम पड़ेगी। हम जो कहते हैं कि ”सफलता का कोई शॅर्टकट नहीं है” यह भी लोगों के अनुभव द्वारा प्रमाणित तत्‍य है। कहते हैं कि –

”जो व्‍यक्ति कड़ी मेहनत, पूर्ण निष्‍ठा एवं लगन से अपने लक्ष्‍य की पूर्ति हेतु प्रयास करता है, वह हमेशा सफल होता है” – यह तथ्‍य भी तो दूसरों के अनुभव का परिणाम है।

”कई व्‍यक्ति आदर्श त्रुटिरहित कार्य करने की भावना के इतने दबाव में रहते हैं कि वे थोड़ी भी प्रतिकूल परिस्थितियों में, त्रुटियाँ होने के डर से, अनुकूल परिस्थिति आने तक कोई कार्य करते ही नहीं हैं।”

18. व्‍यावहारिक बनें

जीवन में सफल होने के लिए व्‍यक्ति का व्‍यावहारिक होना एक महत्वपूर्ण तत्‍व है। व्‍यावहारिकता से अनावश्‍यक तनाव एवं समस्‍याओं में स्‍वत: ही कमी आती है। अनावश्‍यक रूप से उत्‍पन्‍न होने वाली गलतफहमियॉं, आपसी द्वेष उत्‍पन्‍न नहीं होता है। व्‍यावहारिक होने से आपको लोगों का सहयोग मिलता है, अपने साथियों में आप लोकप्रिय होते हैं। कई बार जो कार्य पैसे से नहीं हो पाता वह कार्य व्‍यावहारिकता एवं विनम्रता से हो जाता है। विनम्रता एवं व्‍यावहारिकता एक-दूसरें की सहोदर हैं।

जो व्‍यक्ति व्‍यावहारिक नहीं होते हैं, उनके जीवन में हर क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन परेशानियॉं आती रहती हैं, तनाव बना रहता है। जीवन मे आगे बढ़ने के स्‍थान पर, वे अपने व्‍यवहार से उत्‍पन्‍न समस्‍याओं में उलझे रहते हैं। कई बार तो स्थिति इतनी विस्‍फोटक हो जाती है कि व्‍यवसाय को ही बन्‍द करने की नौबत आ जाती है। आप नौकरी में हैं तो आपके व्‍यवहार के कारण आपके ‘बॉस’ या आपके सहकर्मियों से आपका मनमुटाव, द्वेषता बनी रहती है।

आप चाहें किसी नौकरी में, किसी प्रोफेशन मे हों या आपका स्‍वयं का व्‍यवसाय हो, व्‍यावहारिकता जीवन में सुचारु, तनाव रहित, कटुता रहित, द्वेष रहित रखनें में बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

”कुछ नहीं मिलता जीवन में माँगने से, सफलता मिलती नहीं, राह में रुक जाने से, ईश्‍वर को साक्षी रखकर, विश्‍वास रखना स्‍वयं की कुव्‍वत पर, सब कुछ मिलता है भैय्या, सही वक्‍त आने पर।”

19. जिज्ञासु बने

मानव मस्तिष्‍क में अनगिनत विलक्षण शक्तियॉं छिपी हुई हैं। इन शक्तियों के समुचित उपयोग से व्‍यक्ति ऐसी अद्भुत सफलता प्राप्‍त कर सकता है, जिसकी वह स्‍वयं भी कभी कल्‍पना नहीं कर सकता। इसके लिए आवश्‍यक है वक्ति का जिज्ञासु होना, नई चीज़ों को जानने की इच्‍छा, नए तरीकों को अपनाना। आवश्‍यकता है आपका मस्तिष्‍क खुला रहे, ऑंखें खुली रहें, अपने आसपास हो रही नई खोज, नई वस्‍तुओं की जानकारी करते रहें। आज जो भी नई वस्‍तुऍं आ रही हैं उनमें नई-नई तकनीकी का प्रयोग करके, किस तरह से कन्‍ज्‍यूमर्स को आकर्षित एवं प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। हर क्षेत्र में होने वाले आविष्‍कार मुख्‍य रूप से टीवी, मोबाइल, ऑटोमोबाइल्‍स के क्षेत्र में आ रहे नए-नए उत्‍पाद, व्‍यक्ति की जिज्ञासु प्रवृत्ति का ही परिणाम है। आपकी जिज्ञासु प्रवृत्ति, आपकी चीज़ों को जानने की उत्‍सुकता, आपको सफलता के नए-नए आयाम स्‍थापित करने मे बहुत मददगार होती है। व्‍यक्ति को अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए। सफलता के लिए वैसे भी आपको लगातार जागरूक रहने की आवश्‍यकता है। सफलता एक स्‍तर प्राप्‍त कर लेने तक सीमित नहीं है। सफलता के लिए आवश्‍यक है कि आप उस स्‍तर को बनाए रखें एवं आगे बढ़ते जाऍं। आपकी रचनात्‍मकता, आपकी जिज्ञासु प्रवृत्ति, आप द्वारा नई-नई तकनीकों का विकास करने मे बहुत अहम् भूमिका अदा करती है एवं सफलता के नए द्वारा खोलती है, नई बुलन्दियॉं छूने में सहायक होती है।

”सफल लोग दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, और वहीं असफल लोग कहते हैं- भला इसमें मेरा क्‍या लाभ?” – ब्रेन ट्रेसी

20.  लगातार प्रयास करते रहिये    

सफलता का मूल मन्‍त्र है, लगातार प्रयास करते रहें। सफलता की राह मे बहुत फिसलन है, बहुत प्रकार की अड़चनें, परेशानियॉं आती हैं, यह स्‍वाभाविक है। अभी आपको सफलता नहीं मिली, लेकिन हो सकता है सफलता आपसे दो कदम ही दूर हो। सफलता मात्र एक दिन का प्रयास नहीं, बल्कि यह लगातार प्रयासों का समग्र परिणाम होती है।

शुरुआत में व्‍यक्ति को जानकारी का अभाव होता है, अनुभव की कभी होती है। अत: उसकी राह में कई परेशानियॉं आती हैं लेकिन अंतत: सफल वही होता है, जो लगातार प्रयासरत रहता है। आप किसी अभीष्‍ट परीक्षा हेतु तैयारी कर रहे हैं, लगे रहें। हो सकता है, एक बार में आपको सफलता नहीं मिले। आप अपनी सफलता के कारणों के बारे में ईमानदारी से आकलन करें एवं अपनी कमियों/कमज़ोरियों को दूर करें।

पुन: प्रयास करें, सफलता मिलेगी। मान लो दूसरी बार में भी कुछ कमी रह गई है। कभी-कभी ऐसा भी हो जाता है तो निराश न हों और पूरे उत्‍साह से पुन: मेहनत करके परीक्षा दें। सफलता उसे ही मिलती है, जो लगातार प्रयासरत रहता है। आपने सुना होगा –

“A Quitter Never Wins And a Winner Never Quits.”

अर्थात् जिसने प्रयास छोड़ दिया, उसे सफलता कभी नहीं मिल सकती है और सफल होने वाला कभी प्रयास नहीं छोड़ता है। आज के महानायक अमिताभ बच्‍चन भी जीवन के सफर में एक बार दिवालिया होने की कगार पर पहुँच गए थे, लेकिन वे डटे रहे एवं आज पुन: सफलता के शिखर पर हैं।

साधारण भाषा में समझ लें, आप किसी अभीष्‍ट परीक्षा में दो बार असफल हो गए और आप निराश होकर पुन: उस परीक्षा में नहीं बैठते हो तो आप सफल तो हो ही नहीं सकते, लेकिन आप बहुत धैर्य से अपनी गलतियों को समझो, अपनी कमियों को पहचानों और पुन: पूरी मेहनत करके पूर्ण आत्‍मविश्‍वास से परीक्षा में बैठो, सफलता मिलती ही है। आखिर जो सफल होते हैं वे भी तो आपके हमारे जैसे लोग ही होते हैं।

इसी प्रकार आप जिस व्‍यवसाय में भी संलग्‍न हैं, उसमें कुछ विशिष्‍टता, विशेषता पैदा करें। पूरी ईमानदारी, निष्‍ठा एवं लगन से मेहनत करें, आप अवश्‍य सफल होंगे, जो लोग किसी व्‍यवसाय में असफल होते हैं, उसके लिए अधिकांशतया वह स्‍वयं ही जि़म्‍मेदार होते हैं। प्रोडक्‍ट की घटिया क्‍वालिटी, बेइमानी, व्‍यवहार में अहंकार ऐसे बहुत-से कारण होते हैं जिनके कारण वे असफल होते हैं। हल्‍दीराम भुजिया, लिज्‍जत पापड़, बीकानेरी रसगुल्‍ले ये ऐसे प्रोडक्‍ट हैं, जो अपनी गुणवत्‍ता एवं लगातार प्रयास के कारण आज घर-घर में पसन्‍द किए जाते हैं। ये व्‍यवसाय शुरू में छोटे स्‍तर पर शुरू किए गए, लेकिन आज इन कम्‍पनियों का कई हज़ार करोड़ का टर्नओवर है।

हर खिलाड़ी की सफलता के पीछे भी लगातार प्रयास की सबसे बड़ा कारण है। जीवन में जो व्‍यक्ति पूरी मेहनत, लगन, निष्‍ठा एवं ईमानदारी से किसी भी क्षेत्र मे प्रयासरत रहता है, आज या कल उसे सफलता अवश्‍यक मिलती है। जीवन संघर्ष का ही तो नाम है। आप लगे रहें, सफलता अवश्‍य मिलेगी। आज जो लोग सफल कहलाते हैं, वे कितनी ही बार असफल हुए हैं, लेकिन वे लगातार प्रयासरत रहे।

अब्राहम लिंकन की सफलता की दास्‍तान, इसका बहुत ही श्रेष्‍ठ उदाहरण है। जीवन में जितनी असफलताओं का समाना लिंकन ने किया वह अपने आप में उनके धैर्य का परिचायक है, लेकिन फिर भी वे लगातार प्रयासरत रहे और अमेरिका के प्रे‍सीडेंट बने।

”सफल होने वाले व्‍यक्ति किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति मे उसका सामना करने का पूर्वाभ्‍यास मन ही मन में कर लेते हैं एवं ऐसी परिस्थिति आने पर घबराते नहीं, बल्कि अपना मानसिक सन्‍तुलन बरकरार रखते हैं।”

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About the author

Nitin Gupta

My Name is Nitin Gupta और मैं Civil Services की तैयारी कर रहा हूं ! और मैं भारत के हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश से हूँ। मैं इस विश्व के जीवन मंच पर एक अदना सा और संवेदनशील किरदार हूँ जो अपनी भूमिका न्यायपूर्वक और मन लगाकर निभाने का प्रयत्न कर रहा हूं !!

मेरा उद्देश्य हिन्दी माध्यम में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने बाले प्रतिभागियों का सहयोग करना है ! आप सभी लोगों का स्नेह प्राप्त करना तथा अपने अर्जित अनुभवों तथा ज्ञान को वितरित करके आप लोगों की सेवा करना ही मेरी उत्कट अभिलाषा है !!

2 Comments

  • गुरुः जी मैं कुछ कहकर आपके इस उत्कृष्ट काम के लिए आपके जज्बे को कम नहीं करना चाहता सलाम करता हूँ अगर आप मुझे अपना शिष्य बना ले तो मैं……….. 7080111742(wpa), 7607617453
    गुरुः जी एक सवाल कौंध रहा हमारे संभिधान की प्रस्ताबना मैं जो लिखा वो हो रहा 42 वा संसोधन धर्मनिर्पेक्ष्ता समाजबाद एकता कहाँ हैँ सर 103 वा संसोधन के तहत मुझे हटाना हैँ और कोर्ट की भाषा हिंदी फिर क्यों 343-351 मैं चिल्ला चिल्ला कर बोला गया राजभाषा…… या फिर गांधीजी जी के बन्दर की तरह अपनी अपनी कुछ कर्मेन्द्रिय बंद कर लेनी चाइये वैसे मेरा लक्ष्य 2013 से बने नोटा लगा कर पूरी सांसद खाली करवाना हैँ मार्गदर्शन करें आपका चरणप्रणामकर्ता अभिषेक

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